जगजीत सिंह पहले भारतीय थे जिन्हे विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए लिखा और उन्हे Kalinga prize दिया गया। जगजीत सिंह ने अपना लेखन कार्य National Hearald नाम के अखबार से शुरू किया था। जगजीत सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर M A गणित मे पास किया था। सिंह के पिता जी नेे जलियावाला बाग मे 1919 मे हुई इतिहासिक सभा मे भाग लिया था । सिंह शुरुवात मे पढाई मे अच्छे नही थे लेकिन बाद मे पूरण चंद नाम के अध्यापक ने उनमें विज्ञान के प्रति जागरूकता को बढ़ाया।
थोड़े ही समय मे गणित उनका पसंदीदा विषय बन गया। हालाँकि बाद मे उन्होंने भारतीय रेलवे मे नोकरी कर ली। लेकिन नोकरी के साथ साथ उन्होंने बहुत सारे शोध पत्र भी लिखे।
शुरुवात मे जब सिंह ने विज्ञान के लिए लिखना शुरू किया तो संपादक उनके काम को शक की नजर से देखते थे क्युकि उनको लगता था की रेलवे का कर्मचारी कहा विज्ञान के लिए लिखने निकल पड़ा। उन्होंने ११ किताबे प्रकाशित की। जिनमे से कुछ प्रमुख के नाम है, MATHEMATICAL IDEAS: their nature and use, Modern Cosmology, and Some Eminent Indian Scientist. कुछ किताबे विदेश मे Japanese और Dutch भाषा मे भी प्रकाशित हुई।
उनके आलोचक जब उनकी आलोचना करते तो वह कहते की अगर ऐसा लिखु जो पढ़ने मे बहुत आसान हो इसका मतलब आप पहले से ही जानते हो की क्या लिखा है,फिर लिखने का क्या फायदा। वो कहते जब लोग जब नया पढेगे तो ज्ञान बढ़ेगा और ज्ञान ही शक्ति है। उनको लगता था कि दैनिक जीवन मे बोली जाने वाली भाषा विज्ञान मे हुए विकास के साथ कदम मिलाकर नही चल सकी।
सिंह 1962 मे दक्षिण उत्तर रेलवे से प्रबंधक के पद से सेवामुक्त हुए।
विज्ञान के लोकप्रियकरण के लिए कलिंग पुरस्कार लोगों को वैज्ञानिक विचारों को प्रस्तुत करने में असाधारण कौशल के लिए यूनेस्को द्वारा दिया गया एक पुरस्कार है। इसे 1952 में भारत में कलिंग फाउंडेशन ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष बीजू पटनायक के दान के बाद बनाया गया था।
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