Tuesday, June 9, 2020

अपने सीनियर से नाराज हुए तो वापस जालंधर जाकर SCIENTIFIC OPINION नाम की पत्रिका शुरू कर ली- जानिए भारत के दूसरे Kalinga Prize Winner के बारे मे।

नरेंद्र के सहगल 1970 मे अमेरिका से अणु भौतिकी मे (PARTICLE PHYSICS) Ph D कर के वापस आये और चेन्नई मे Matscience मे काम करने लगे।

बाद मे किसी बात को लेकर अपने सीनियर नाराज से  हुए तो जालंधर वापस आ गये। जालंधर, पंजाब आकर SCIENTIFIC OPINION(1972) नाम की विज्ञान की पत्रिका शुरू कर ली। यही से उनका विज्ञान के लिया लिखना शुरू हो गया।

वैज्ञानिको को ये पत्रिका बहुत पसंद आये। उस समय के बहुत अच्छे अच्छे वैज्ञानिक यश पाल, सतीश धवन और भारत के पहले Kalinga Prize पाने वाले जगजीत सिंह को ये बहुत पसंद आई। अमेरिका मे उस पत्रिका को विज्ञान नीति निरधारण के विधायर्थियो को पढाया जाने लगा। NATURE नाम की प्रख्यात पत्रिका ने  उन्हे भारत मे विज्ञान के विकास मे  होने वाले के बारे मे लिखने के लिए आमंत्रित किया।

लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पत्रिका बंद करनी पड़ी और वे 1976 मे सोमालिया चले गये।
1982 मे NATIONAL COUNCIL OF SCIENCE AND TECHNOLOGY COMMUNICATION(राष्ट्रीय सहकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार) बना और उन्हे पहले प्रमुख वैज्ञानिक और बाद मे निर्देशक बनाया गया।
उनके योगदान के कारण NCSTC आज विज्ञान को बहुप्रिय बनाने कई कार्यक्रम चला रहा है।
Bharat ki Chaap, Kyu aur Kaise, रेडियो कार्यक्रम Vigyan Vidhi, Manav ka Vikas और Bharat Jan Vigyan Jatha जिसने वैज्ञानिको और आम जन मानस के बीच की दीवार को तोड़ा, उनके समय के कार्यक्रम है।
उनका जन्म लाहौर मे 1940 मे हुआ और उनका बचपन जालंधर मे व्यतीत हुआ । 1991 में नरेंद्र के सहगल को वैज्ञानिक ज्ञान की अखंडता और पहुंच को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए "विज्ञान के लोकप्रियकरण के लिए यूनेस्को कलिंग पुरस्कार" से सम्मानित किया गया, और वैज्ञानिक और तकनीकी संस्कृति को व्यापक आधार प्रदान किया।

                               

Friday, June 5, 2020

भारत के पहले Kalinga Prize Winner - Jagjit Singh ( पंजाब के अमृतसर मे 15 May 1912 को जन्मे)

" पिछले रविवार जिन विधार्थियो ने जगजीत सिंह का Article नही पढ़ा वो कक्षा मे ना आये " जी हाँ सही पढ रहे है आप। यही लिखा होता था लखनऊ के Professor डी पी सिंह, Professor of Economics, लखनऊ विशवविद्यालय,की कक्षा के बाहर। खुद जब जगजीत सिंह को ये बात पता चली तो उन्होंने ज्यादा लिखना शुरू कर दिया।




 Shri Jagjit Singh 1912-2002 (Kalinga Prize 1963 Jagjit Singh (writer) – India)


जगजीत सिंह पहले भारतीय थे जिन्हे विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए लिखा और उन्हे Kalinga prize दिया गया। जगजीत सिंह ने अपना लेखन कार्य National Hearald नाम के अखबार से शुरू किया था। जगजीत सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय, लाहौर M A गणित मे पास किया था। सिंह के पिता जी नेे जलियावाला बाग मे 1919 मे हुई इतिहासिक सभा मे भाग लिया था । सिंह शुरुवात मे पढाई मे अच्छे नही थे लेकिन बाद मे पूरण चंद नाम के अध्यापक ने उनमें विज्ञान के प्रति जागरूकता को बढ़ाया।


थोड़े ही समय मे गणित उनका पसंदीदा विषय बन गया। हालाँकि बाद मे उन्होंने भारतीय रेलवे मे नोकरी कर ली। लेकिन नोकरी के साथ साथ उन्होंने बहुत सारे शोध पत्र भी लिखे।
शुरुवात मे जब सिंह ने विज्ञान के लिए लिखना शुरू किया तो संपादक उनके काम को शक की नजर से देखते थे क्युकि उनको लगता था की रेलवे का कर्मचारी कहा विज्ञान के लिए लिखने निकल पड़ा। उन्होंने ११ किताबे प्रकाशित की। जिनमे से कुछ प्रमुख के नाम है, MATHEMATICAL IDEAS: their nature and use, Modern Cosmology, and Some Eminent Indian Scientist. कुछ किताबे विदेश मे Japanese और Dutch भाषा मे भी प्रकाशित हुई।


उनके आलोचक जब उनकी आलोचना करते तो वह कहते की अगर ऐसा लिखु जो पढ़ने मे बहुत आसान हो इसका मतलब आप पहले से ही जानते हो की क्या लिखा है,फिर लिखने का क्या फायदा। वो कहते जब लोग जब नया पढेगे तो ज्ञान बढ़ेगा और ज्ञान ही शक्ति है। उनको लगता था कि दैनिक जीवन मे बोली जाने वाली भाषा विज्ञान मे हुए विकास के साथ कदम मिलाकर नही चल सकी।


सिंह 1962 मे दक्षिण उत्तर रेलवे से प्रबंधक के पद से सेवामुक्त हुए।
विज्ञान के लोकप्रियकरण के लिए कलिंग पुरस्कार लोगों को वैज्ञानिक विचारों को प्रस्तुत करने में असाधारण कौशल के लिए यूनेस्को द्वारा दिया गया एक पुरस्कार है। इसे 1952 में भारत में कलिंग फाउंडेशन ट्रस्ट  के संस्थापक अध्यक्ष बीजू पटनायक के दान के बाद बनाया गया था।

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